Posts

Showing posts from September, 2021

वो इक्कीस का प्यार

 आज भी जब अकेले बैठकर सोचता हूँ,तो मन में ख्याल बार-बार आ जाता है। क्या वो इक्कीस का प्यार आज भी उतना ही जरूरी होता जितना उस समय था या नादानी कहकर उसे थोड़ा दूर से ही एक टक देखते। जिंदगी में उतार चढ़ाव तो आते ही रहते हैं। जो नदियाँ बरसात में पूरे उफान पर होती हैं, वही नदियाँ भीषण गर्मी में बस एक जलधार में सिमट कर रह जाती है। ठीक इसी तरह जीवन के मौसम भी बदलते हैं। ढाक के तीन पात तो हमेशा नहीं रहते न।आदमी अपने व्यक्तित्व अनुभवों के बल पर हर परिस्थिति की समीक्षा करता रहता है। आज मैं भी थोड़े से अनुभवों की गठरी लेकर जीवन के रास्ते पार कर रहा हूँ तो लगता है कि वो इक्कीस का प्यार नादानी ही था और थोड़ा कौड़ा घूंट भी। कड़वाहट इतनी हो गयी उस घूंट की मानों मीठा कभी देखा ही नहीं है। वो इक्कीस का प्यार न आगे बढ़ने देता है और न पीछे मुड़ने का हौसला देता है। 'एक मुन्तशिर' की कलम से।